केसव — तुलसीदास — पूरे बोल और भावार्थ
‘केसव’ तुलसीदास की रचना है। तुलसीदास कहते हैं — हे केशव, आपकी विचित्र रचना (संसार) के बारे में क्या कहूँ? यह बिना दीवार और रंग के बना चित्र है, जो धोने से मिटता नहीं। कोई इसे सत्य कहता है, कोई झूठ, कोई दोनों। तुलसी कहते हैं कि जो इन तीनों भ्रमों को छोड़ दे, वही अपने असली स्वरूप को पहचानता है।
तुलसीदास की रचना। सभी संत भजन।
पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

केसव, कहि न जाइ का कहिये। देखत तव रचना बिचित्र हरि, समुझि मनहिं मन रहिये॥ सून्य भीति पर चित्र, रंग नहिं, तनु बिनु लिखा चितेरे। धोये मिटइ न मरइ भीति, दुख पाइय एहि तनु हेरे॥ रबिकर-नीर बसै अति दारुन, मकर रूप तेहि माहीं। बदन-हीन सो ग्रसै चराचर, पान करन जे जाहीं॥ कोउ कह सत्य, झूठ कह कोऊ, जुगल प्रबल कोउ मानै। तुलसिदास परिहरै तीन भ्रम, सो आपन पहिचानै॥
भावार्थ: तुलसीदास कहते हैं — हे केशव, आपकी विचित्र रचना (संसार) के बारे में क्या कहूँ? यह बिना दीवार और रंग के बना चित्र है, जो धोने से मिटता नहीं। कोई इसे सत्य कहता है, कोई झूठ, कोई दोनों। तुलसी कहते हैं कि जो इन तीनों भ्रमों को छोड़ दे, वही अपने असली स्वरूप को पहचानता है।
केसव — तुलसीदास का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।
