मैया — सूरदास — पूरे बोल और भावार्थ
‘मैया’ सूरदास की रचना है। बाल कृष्ण माँ से पूछते हैं — मैया, मेरी चोटी कब बढ़ेगी? तूने कहा था दूध पीने से बलराम जैसी लंबी-मोटी चोटी हो जाएगी, पर कितनी बार दूध पी लिया, चोटी तो अब भी छोटी है। सूरदास इस बाल-लीला में वात्सल्य रस का सुंदर चित्र खींचते हैं।
सूरदास की रचना। सभी संत भजन।
पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी? किती बार मोहिं दूध पियत भइ, यह अजहूँ है छोटी॥ तू जो कहति बल की बेनी ज्यौं, ह्वै है लाँबी मोटी। काढ़त गुहत न्हवावत जैहै, नागिनि सी भुइँ लोटी॥ काँचौ दूध पियावति पचि पचि, देति न माखन रोटी। सूरज चिरजीवौ दोउ भैया, हरि हलधर की जोटी॥
भावार्थ: बाल कृष्ण माँ से पूछते हैं — मैया, मेरी चोटी कब बढ़ेगी? तूने कहा था दूध पीने से बलराम जैसी लंबी-मोटी चोटी हो जाएगी, पर कितनी बार दूध पी लिया, चोटी तो अब भी छोटी है। सूरदास इस बाल-लीला में वात्सल्य रस का सुंदर चित्र खींचते हैं।
मैया — सूरदास का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।
