निर्जला एकादशी कब है?
निर्जला एकादशी 2027 में 14 जून 2027, सोमवार को है। यह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। व्रत का पारण 15 जून: सुबह 5:22 के बाद करें।

निर्जला एकादशी: तारीख़ और पारण समय
| साल | तारीख़ | एकादशी तिथि | पारण (व्रत खोलना) |
|---|---|---|---|
| 2027 | 14 जून 2027, सोमवार | रात 2:13, 14 जून से रात 2:09, 15 जून तक | 15 जून: सुबह 5:22 के बाद |
उदया तिथि के नियम से, नई दिल्ली के अनुसार।
निर्जला एकादशी का महत्व
कहाँ मनाया जाता है: पूरे भारत में
इसमें पानी तक नहीं पिया जाता, इसलिए यह सबसे कठिन एकादशी है। महाभारत के अनुसार भीम हर एकादशी पर भूखे नहीं रह पाते थे, तो वेदव्यास जी ने उन्हें यह एक निर्जला व्रत रखने को कहा, जिससे साल की सभी एकादशियों का फल मिलता है।
इस दिन पानी से भरा घड़ा, पंखा, छाता और शरबत दान करने की परंपरा है।
कभी-कभी स्मार्त (गृहस्थ) और वैष्णव एकादशी अलग-अलग दिन पड़ती है; वैष्णव परंपरा वाले अगले दिन व्रत रखते हैं।
निर्जला एकादशी की पूजा विधि
- दशमी की रात से सात्विक भोजन करें और चावल न खाएँ।
- एकादशी की सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
- विष्णु जी को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत चढ़ाएँ, घी का दीपक जलाएँ।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें, विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा पढ़ें।
- दिन में फलाहार या निर्जल व्रत अपनी क्षमता के अनुसार रखें, रात में भजन-कीर्तन करें।
- अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद, द्वादशी खत्म होने से पहले दान देकर व्रत खोलें (पारण)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
निर्जला एकादशी 2027 कब है?
निर्जला एकादशी 2027 में 14 जून 2027, सोमवार को है। यह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। व्रत का पारण 15 जून: सुबह 5:22 के बाद करें।
निर्जला एकादशी का पारण कब है?
15 जून: सुबह 5:22 के बाद (नई दिल्ली)।
निर्जला एकादशी का महत्व क्या है?
बिना पानी का व्रत, साल की सभी एकादशियों का फल। इसमें पानी तक नहीं पिया जाता, इसलिए यह सबसे कठिन एकादशी है। महाभारत के अनुसार भीम हर एकादशी पर भूखे नहीं रह पाते थे, तो वेदव्यास जी ने उन्हें यह एक निर्जला व्रत रखने को कहा, जिससे साल की सभी एकादशियों का फल मिलता है।
एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?
फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू, शकरकंद और सेंधा नमक। चावल, गेहूँ, दालें, प्याज़-लहसुन और साधारण नमक नहीं खाते।
एकादशी का पारण कब करें?
अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई हिस्सा) बीत जाने पर पारण करना श्रेष्ठ माना गया है।
एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?
परंपरा के अनुसार एकादशी पर अन्न, ख़ासकर चावल, का त्याग किया जाता है, ताकि मन और शरीर हल्का रहे और ध्यान भगवान में लगे।
Nirjala Ekadashi 2027 date and parana time?
Nirjala Ekadashi 2027: 14 June 2027. Parana (vrat kholna): 15 जून: सुबह 5:22 के बाद (New Delhi).
