पग घुँघरू बाँधि मीरां नाची — मीराबाई — पूरे बोल और भावार्थ
‘पग घुँघरू बाँधि मीरां नाची’ मीराबाई की रचना है। मीरा पैरों में घुँघरू बाँधकर नाचीं और अपने नारायण की सच्ची हो गईं। लोग उन्हें बावरी कहते हैं, बिरादरी कुल का नाश करने वाली कहती है; राणा ने विष का प्याला भेजा तो मीरा हँसते हुए पी गईं। मीरा कहती हैं — उन्हें अविनाशी गिरधर नागर सहज ही मिल गए।
मीराबाई की रचना। सभी संत भजन।
पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

पग घुँघरू बाँधि मीरां नाची। मैं तो मेरे नारायण सूँ, आपहि हो गई साची॥ लोग कहै, मीरां भइ बावरी; न्यात कहै कुल-नासी। विस का प्याला राणा भेज्या, पीवत मीरां हाँसी॥ मीरां के प्रभु गिरधर नागर, सहज मिले अविनासी॥
भावार्थ: मीरा पैरों में घुँघरू बाँधकर नाचीं और अपने नारायण की सच्ची हो गईं। लोग उन्हें बावरी कहते हैं, बिरादरी कुल का नाश करने वाली कहती है; राणा ने विष का प्याला भेजा तो मीरा हँसते हुए पी गईं। मीरा कहती हैं — उन्हें अविनाशी गिरधर नागर सहज ही मिल गए।
पग घुँघरू बाँधि मीरां नाची — मीराबाई का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।
