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सिंहाचलम नरसिंह लाइव दर्शन: आज के दर्शन और आरती

श्री वराह लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर, सिंहाचलम, विशाखापत्तनम के आज के लाइव दर्शन इसी पेज पर देखें — सीधे मंदिर के आधिकारिक YouTube चैनल “Simhachalam Devasthanam” से। प्रसारण आरती और विशेष अवसरों पर लाइव आता है; उस समय लाइव न हो तो ‘दर्शन और आरती’ दबाएँ, मंदिर के सबसे नए दर्शन चलेंगे।

आज के लाइव दर्शन

श्री वराह लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर

स्रोत: मंदिर का आधिकारिक YouTube चैनल “Simhachalam Devasthanam” — सिंहाचलम देवस्थानम का आधिकारिक चैनल। वीडियो के सभी अधिकार उन्हीं के हैं। सभी मंदिरों के लाइव दर्शन

साथ में पढ़ें: ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

हे जगत के स्वामी श्रीहरि, आपकी जय हो। आप भक्तों और सेवकों के संकट पल भर में दूर कर देते हैं।

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

जो आपका ध्यान करता है उसे फल मिलता है, मन का दुख मिटता है, घर में सुख-संपत्ति आती है और शरीर के कष्ट दूर होते हैं।

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी, स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥

आप ही मेरे माता-पिता हैं, मैं और किसकी शरण लूँ। आपके सिवा कोई दूसरा नहीं जिससे मैं आशा रखूँ।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥

आप पूर्ण परमात्मा हैं, सबके मन की जानने वाले हैं। आप ही परब्रह्म परमेश्वर और सबके स्वामी हैं।

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता। मैं मूरख फलकामी, मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥

आप करुणा के सागर और पालन करने वाले हैं। मैं फल की कामना करने वाला अज्ञानी सेवक हूँ, आप स्वामी हैं — मुझ पर कृपा कीजिए।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥

आप एक हैं, इंद्रियों से परे हैं और सबके प्राणों के स्वामी हैं। हे दयालु, मैं कम बुद्धि वाला आपसे कैसे मिलूँ?

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे। अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

आप दीनों के मित्र और दुख हरने वाले मेरे ठाकुर हैं। अपना हाथ बढ़ाइए और मुझे अपनी शरण में लीजिए, मैं आपके द्वार पर हूँ।

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

हे देव, मेरे मन के विकार मिटाइए और पाप हर लीजिए। मेरी श्रद्धा, भक्ति और संतों की सेवा का भाव बढ़ाइए।

तन मन धन सब कुछ है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा। तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥

यह तन, मन और धन सब आपका ही है। आपका ही आपको अर्पित है, इसमें मेरा क्या लगता है।

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

हे जगदीश्वर, आपकी जय हो — आरती का समापन फिर से पहली पंक्ति से होता है।

अर्थ सहित पढ़ें

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