आरती कुंजबिहारी की — सरगम नोट्स
| बोल | सरगम (हारमोनियम नोट्स) |
|---|---|
| आरती कुंजबिहारी की | प – प प म प नि नि ध प – म ग रे |
| श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की | सा रे प म म ग ग सा रे सा नि सा – |
| गले में बैजंती माला | ग ग ग रे – रे ग रे सा नि सा – |
| बजावै मुरली मधुर बाला | ग ग – ग रे – रे रे ग रे रे सा नि सा – |
| श्रवण में कुण्डल झलकाला | ग ग – ग रे – रे ग रे रे सा नि सा – |
| नंद के आनंद नंदलाला | ग – ग ग रे – रे ग रे रे सा नि सा – |
संकेत कैसे पढ़ें: सुर के नीचे बिंदु = मंद्र सप्तक (नीचे वाला), ऊपर बिंदु = तार सप्तक (ऊपर वाला), नीचे लकीर = कोमल सुर (काली पट्टी), ऊपर लकीर = तीव्र म, – = पिछला सुर एक मात्रा और खींचें। नोट्स सबसे प्रचलित धुन के हिसाब से हैं; आपके इलाक़े या मंडली की धुन थोड़ी अलग हो सकती है।
धुन के बारे में
जन्माष्टमी और रोज़ की कृष्ण आरती। पहली पंक्ति में कोमल नि (नि॒) आता है — काली पट्टी, जो ध के ठीक ऊपर है। बाक़ी आरती सा-रे-ग के आसपास और मंद्र नि पर लौटती है।
कैसे सीखें
- ▶ बजाएँ से पूरी धुन असली रफ़्तार पर एक-दो बार सुनें।
- रफ़्तार 60–70% पर लाएँ, किसी एक पंक्ति पर टैप करें, "चुनी पंक्ति दोहराएँ" लगाएँ और ✋ अभ्यास मोड में बजाएँ।
- एक पंक्ति बिना रुके बजने लगे, तब अगली पंक्ति पर जाएँ।
- आख़िर में रफ़्तार धीरे-धीरे 100% तक लाएँ और पूरी आरती गाते हुए बजाएँ।
पूरी आरती के बोल और अर्थ: आरती कुंजबिहारी की।
