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जय गणेश जय गणेश देवा — हारमोनियम नोट्स (सरगम)

जय गणेश जय गणेश देवा की पहली पंक्ति "जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा" के सुर हैं: सा सा रे रे ग ग ग ग ग ग म ग म ग रे रे। पूरी धुन नीचे सरगम में लिखी है — प्लेयर में ▶ दबाकर सुनें, या ✋ अभ्यास मोड में ख़ुद बजाएँ।

जय गणेश जय गणेश देवा — सरगम नोट्स

बोलसरगम (हारमोनियम नोट्स)
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवासा सा रे रे ग ग ग ग ग ग म ग म ग रे रे
माता जाकी पार्वती पिता महादेवानि नि सा नि रे रे रे रे ग ग रे सा सा –
एक दंत दयावंत चार भुजा धारीसा सा ग म प प प प म प म प म ग ग –
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारीसा ग म ग प प प प म प म प म ग ग –
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवासा सा रे रे ग ग ग ग ग ग म ग म ग रे रे
माता जाकी पार्वती पिता महादेवानि नि सा नि रे रे रे रे ग ग रे सा सा –

संकेत कैसे पढ़ें: सुर के नीचे बिंदु = मंद्र सप्तक (नीचे वाला), ऊपर बिंदु = तार सप्तक (ऊपर वाला), नीचे लकीर = कोमल सुर (काली पट्टी), ऊपर लकीर = तीव्र म, – = पिछला सुर एक मात्रा और खींचें। नोट्स सबसे प्रचलित धुन के हिसाब से हैं; आपके इलाक़े या मंडली की धुन थोड़ी अलग हो सकती है।

धुन के बारे में

गणेश जी की यह आरती हर पूजा की शुरुआत में गाई जाती है। स्थायी (जय गणेश…) सा से ग तक घूमती है और अंतरा (एक दंत…) प तक ऊपर जाता है। केवल शुद्ध सुर हैं, कोई कोमल-तीव्र नहीं — शुरुआत के लिए आसान।

कैसे सीखें

  1. ▶ बजाएँ से पूरी धुन असली रफ़्तार पर एक-दो बार सुनें।
  2. रफ़्तार 60–70% पर लाएँ, किसी एक पंक्ति पर टैप करें, "चुनी पंक्ति दोहराएँ" लगाएँ और ✋ अभ्यास मोड में बजाएँ।
  3. एक पंक्ति बिना रुके बजने लगे, तब अगली पंक्ति पर जाएँ।
  4. आख़िर में रफ़्तार धीरे-धीरे 100% तक लाएँ और पूरी आरती गाते हुए बजाएँ।

पूरी आरती के बोल और अर्थ: जय गणेश जय गणेश देवा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जय गणेश जय गणेश देवा के हारमोनियम नोट्स क्या हैं?

पहली पंक्ति "जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा" के सुर हैं: सा सा रे रे ग ग ग ग ग ग म ग म ग रे रे। पूरी आरती के सरगम ऊपर की तालिका में हैं, और प्लेयर में बजाकर सुन सकते हैं।

जय गणेश जय गणेश देवा किस सुर (स्केल) में बजाएँ?

नोट्स सा के हिसाब से लिखे हैं, इसलिए किसी भी स्केल में बजा सकते हैं। सीखते समय सफ़ेद 1 (C) सबसे आसान है; गाते समय अपनी आवाज़ के हिसाब से 'सा का सुर' बदल लें — पूरी धुन अपने-आप उसी सुर में चली जाएगी।

धुन मेरी मंडली वाली से थोड़ी अलग क्यों लग रही है?

पारंपरिक आरतियों की धुन इलाक़े और परिवार के हिसाब से थोड़ी बदलती है। यहाँ सबसे प्रचलित धुन दी है। आप किसी पंक्ति को अलग तरह गाते हैं तो हमें WhatsApp चैनल पर बताएँ।

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