ॐ जय जगदीश हरे — सरगम नोट्स
| बोल | सरगम (हारमोनियम नोट्स) |
|---|---|
| ॐ जय जगदीश हरे | सा – सा – सा सा सा – नि सा रे – |
| स्वामी जय जगदीश हरे | रे ग म – प प ध प म ग रे – |
| भक्त जनों के संकट | रे ग रे ग म – म ग रे ग रे सा |
| दास जनों के संकट | रे ग रे ग म – म ग रे ग रे सा |
| क्षण में दूर करे | सा सा रे – ग रे सा नि ध – |
| ॐ जय जगदीश हरे | सा – सा – सा सा सा – नि सा रे – |
संकेत कैसे पढ़ें: सुर के नीचे बिंदु = मंद्र सप्तक (नीचे वाला), ऊपर बिंदु = तार सप्तक (ऊपर वाला), नीचे लकीर = कोमल सुर (काली पट्टी), ऊपर लकीर = तीव्र म, – = पिछला सुर एक मात्रा और खींचें। नोट्स सबसे प्रचलित धुन के हिसाब से हैं; आपके इलाक़े या मंडली की धुन थोड़ी अलग हो सकती है।
धुन के बारे में
यह आरती पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी ने 1870 के आसपास लिखी थी और आज लगभग हर घर में संध्या आरती में गाई जाती है। धुन मध्य सप्तक में ही चलती है, बस "क्षण में दूर करे" पर मंद्र नि और ध तक उतरती है — इसलिए यह हारमोनियम सीखने वालों का सबसे अच्छा पहला गाना है।
कैसे सीखें
- ▶ बजाएँ से पूरी धुन असली रफ़्तार पर एक-दो बार सुनें।
- रफ़्तार 60–70% पर लाएँ, किसी एक पंक्ति पर टैप करें, "चुनी पंक्ति दोहराएँ" लगाएँ और ✋ अभ्यास मोड में बजाएँ।
- एक पंक्ति बिना रुके बजने लगे, तब अगली पंक्ति पर जाएँ।
- आख़िर में रफ़्तार धीरे-धीरे 100% तक लाएँ और पूरी आरती गाते हुए बजाएँ।
पूरी आरती के बोल और अर्थ: ॐ जय जगदीश हरे।
