OmKiran BhaktiOmKiran Bhaktiभजन, आरती, चालीसा और मंत्र

अहोई माता की आरती — जय अहोई माता, बोल और अर्थ

‘जय अहोई माता’ अहोई अष्टमी पर संतान की लंबी आयु के लिए गाई जाने वाली आरती है।

अहोई अष्टमी 2026 कब है · अहोई अष्टमी व्रत कथा

अहोई माता की आरती — जय अहोई माता, बोल और अर्थ

जय अहोई माता, जय अहोई माता। तुमको निसदिन ध्यावत, हर विष्णु विधाता॥

हे अहोई माता, आपकी जय हो; शिव, विष्णु और ब्रह्मा दिन-रात आपका ध्यान करते हैं।

ब्रह्माणी रुद्राणी कमला, तू ही है जगमाता। सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

आप ही ब्रह्माणी, रुद्राणी और लक्ष्मी हैं, आप ही जगत की माता हैं; सूर्य-चंद्रमा ध्यान करते हैं और नारद गुण गाते हैं।

माता रूप निरंजन, सुख संपत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, नित मंगल पाता॥

माँ, आपका रूप निर्मल है और आप सुख-संपत्ति देती हैं; जो आपका ध्यान करता है, वह रोज़ मंगल पाता है।

तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता। कर्म प्रभाव प्रकाशक, जगनिधि से त्राता॥

आप पाताल में भी बसती हैं, शुभ देती हैं, कर्मों का फल प्रकट करती हैं और संसार-सागर से बचाती हैं।

जिस घर थारो वासा, वाहि में गुण आता। कर न सके सोई कर ले, मन नहीं घबराता॥

जिस घर में आपका वास होता है, वहाँ गुण आते हैं; जो न हो सके वह भी हो जाता है और मन नहीं घबराता।

तुम बिन सुख न होवे, न कोई पुत्र पाता। खान पान का वैभव, तुम बिन नहीं आता॥

आपके बिना सुख नहीं, संतान का सुख नहीं, और खाने-पीने का वैभव भी नहीं आता।

शुभ गुण सुंदर युक्ता, क्षीर निधि जाता। रतन चतुर्दश तोकू, कोई नहीं पाता॥

आप सुंदर शुभ गुणों से युक्त हैं, क्षीरसागर से प्रकट हुई हैं; आपके बिना कोई चौदह रत्न नहीं पाता।

श्री अहोई माँ की आरती, जो कोई गाता। उर उमंग अति उपजे, पाप उतर जाता॥

जो अहोई माँ की यह आरती गाता है, उसके मन में उमंग भरती है और पाप उतर जाते हैं।

अहोई माता की आरती का पाठ पूरा हुआ।

किसी अपने को WhatsApp पर भेजें

पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Ahoi Mata Ki Arti — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Jai ahoi mata, jai ahoi mata ।
Tumko nisdin dhyavat, har vishnu vidhata ॥

Brahmani rudrani kamla, tu hi hai jagmata ।
Surya chandrama dhyavat, narad rishi gata ॥

Mata rup niranjan, sukh sanpatti data ।
Jo koi tumko dhyavat, nit mangal pata ॥

Tu hi patal basanti, tu hi hai shubhdata ।
Karm prabhav prakashak, jagnidhi se trata ॥

Jis ghar tharo vasa, vahi men gun ata ।
Kar na sake soi kar le, man nahin ghabrata ॥

Tum bin sukh na hove, na koi putra pata ।
Khan pan ka vaibhav, tum bin nahin ata ॥

Shubh gun sundar yukta, kshir nidhi jata ।
Ratan chaturdash toku, koi nahin pata ॥

Shri ahoi man ki arti, jo koi gata ।
Ur umang ati upje, pap utar jata ॥

चैनल से जुड़ें