आमलकी एकादशी कब है?
आमलकी एकादशी 2027 में 18 मार्च 2027, गुरुवार को है। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसे रंगभरी एकादशी भी कहते हैं। व्रत का पारण 19 मार्च: सुबह 6:26 के बाद, रात 11:18 से पहले करें।

आमलकी एकादशी: तारीख़ और पारण समय
| साल | तारीख़ | एकादशी तिथि | पारण (व्रत खोलना) |
|---|---|---|---|
| 2027 | 18 मार्च 2027, गुरुवार | सुबह 4:22, 18 मार्च से रात 1:52, 19 मार्च तक | 19 मार्च: सुबह 6:26 के बाद, रात 11:18 से पहले |
उदया तिथि के नियम से, नई दिल्ली के अनुसार।
आमलकी एकादशी का महत्व
कहाँ मनाया जाता है: पूरे भारत में
इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा होती है, क्योंकि उसमें भगवान विष्णु का वास माना गया है।
काशी में इसे रंगभरी एकादशी कहते हैं; मान्यता है कि शिव जी विवाह के बाद माता पार्वती को लेकर काशी आए थे और यहीं से होली का रंग शुरू होता है।
कभी-कभी स्मार्त (गृहस्थ) और वैष्णव एकादशी अलग-अलग दिन पड़ती है; वैष्णव परंपरा वाले अगले दिन व्रत रखते हैं।
आमलकी एकादशी की पूजा विधि
- दशमी की रात से सात्विक भोजन करें और चावल न खाएँ।
- एकादशी की सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
- विष्णु जी को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत चढ़ाएँ, घी का दीपक जलाएँ।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें, विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा पढ़ें।
- दिन में फलाहार या निर्जल व्रत अपनी क्षमता के अनुसार रखें, रात में भजन-कीर्तन करें।
- अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद, द्वादशी खत्म होने से पहले दान देकर व्रत खोलें (पारण)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आमलकी एकादशी 2027 कब है?
आमलकी एकादशी 2027 में 18 मार्च 2027, गुरुवार को है। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसे रंगभरी एकादशी भी कहते हैं। व्रत का पारण 19 मार्च: सुबह 6:26 के बाद, रात 11:18 से पहले करें।
आमलकी एकादशी का पारण कब है?
19 मार्च: सुबह 6:26 के बाद, रात 11:18 से पहले (नई दिल्ली)।
आमलकी एकादशी का महत्व क्या है?
आंवले के पेड़ की पूजा, काशी में रंगभरी एकादशी। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा होती है, क्योंकि उसमें भगवान विष्णु का वास माना गया है।
एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?
फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू, शकरकंद और सेंधा नमक। चावल, गेहूँ, दालें, प्याज़-लहसुन और साधारण नमक नहीं खाते।
एकादशी का पारण कब करें?
अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई हिस्सा) बीत जाने पर पारण करना श्रेष्ठ माना गया है।
एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?
परंपरा के अनुसार एकादशी पर अन्न, ख़ासकर चावल, का त्याग किया जाता है, ताकि मन और शरीर हल्का रहे और ध्यान भगवान में लगे।
Amalaki Ekadashi 2027 date and parana time?
Amalaki Ekadashi 2027: 18 March 2027. Parana (vrat kholna): 19 मार्च: सुबह 6:26 के बाद, रात 11:18 से पहले (New Delhi).
