OmKiran BhaktiOmKiran Bhaktiभजन, आरती, चालीसा और मंत्र

भोजन मंत्र और सोने से पहले के मंत्र — अर्थ सहित

भोजन से पहले गीता का ‘ब्रह्मार्पणं’ श्लोक या माँ अन्नपूर्णा का मंत्र बोलकर भोजन को प्रसाद बनाया जाता है; और सोने से पहले ‘रामं स्कन्दं हनूमन्तं’ बोलने से बुरे सपने दूर होते हैं।

भोजन मंत्र और सोने से पहले के मंत्र — अर्थ सहित

भोजन से पहले (गीता 4.24)

ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्। ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना॥

अर्पण करने का साधन ब्रह्म है, भोजन ब्रह्म है, अग्नि (भूख) ब्रह्म है और अर्पण करने वाला भी ब्रह्म है; जो हर कर्म में ब्रह्म को देखता है, वह ब्रह्म को ही पाता है।

अन्नपूर्णा मंत्र

अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे। ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥

हे सदा भरपूर रहने वाली, शंकर की प्राणप्रिया माँ अन्नपूर्णा पार्वती, ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि के लिए मुझे भिक्षा (अन्न) दीजिए।

साथ भोजन करते समय — सह नाववतु

ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

परमात्मा हम दोनों की साथ रक्षा करें, साथ पोषण करें; हम साथ मिलकर शक्ति पाएँ; हमारा पढ़ा हुआ तेजस्वी हो; हम आपस में द्वेष न करें। ॐ शांति, शांति, शांति। (कठोपनिषद्)

सोने से पहले — बुरे सपनों से रक्षा

रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नं तस्य नश्यति॥

जो रोज़ सोते समय राम, स्कंद (कार्तिकेय), हनुमान, गरुड़ और भीम का स्मरण करता है, उसके बुरे सपने नष्ट हो जाते हैं।

दिन भर की भूलों की क्षमा

करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्। विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥

हाथ-पैर, वाणी, शरीर, कर्म, कान, आँख या मन से जाने-अनजाने जो भी अपराध हुए हों, हे करुणा के सागर महादेव, सबको क्षमा कीजिए।

भोजन मंत्र और सोने से पहले के मंत्र का पाठ पूरा हुआ।

किसी अपने को WhatsApp पर भेजें

पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

चैनल से जुड़ें