सुखकर्ता दुखहर्ता आरती — मराठी गणपती आरती, बोल और हिंदी अर्थ
‘सुखकर्ता दुखहर्ता’ 17वीं शताब्दी के संत समर्थ रामदास की रचना है, जो महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की हर पूजा में गाई जाती है। इसके साथ शंकर, देवी और ‘घालीन लोटांगण’ की आरती का पूरा क्रम यहाँ है।
मुंबई के सिद्धिविनायक और लालबाग में यही क्रम गाया जाता है।

सुखकर्ता दुःखहर्ता (श्री गणपती आरती — समर्थ रामदास)
सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची। नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची। सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची। कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥ जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती। दर्शनमात्रे मन कामना पुरती॥
सुख देने वाले, दुख हरने वाले गणेश विघ्नों की बात तक मिटा देते हैं; उनकी कृपा प्रेम बरसाती है। पूरे शरीर पर सुंदर सिंदूर का लेप है और गले में मोतियों की माला चमकती है। हे मंगलमूर्ति, आपकी जय हो — दर्शन मात्र से मन की कामना पूरी होती है।
दूसरा पद
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा। चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा। हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा। रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥
हे गौरी-पुत्र, आपके लिए रत्नों से जड़ा आसन है; चंदन, कुमकुम और केसर का लेप है; हीरों से जड़ा मुकुट सुंदर लगता है और चरणों में घुँघरू रुनझुन बजते हैं।
तीसरा पद
लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना। सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना। दास रामाचा वाट पाहे सदना। संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना॥
बड़े पेट वाले, पीले वस्त्र और सर्प की करधनी वाले, सीधी-टेढ़ी सूँड़ और तीन नेत्रों वाले गणेश! राम का दास (समर्थ रामदास) घर पर आपकी राह देखता है — हे देवों के वंदनीय, संकट में आइए और अंत समय रक्षा कीजिए।
लवथवती विक्राळा (श्री शंकराची आरती — समर्थ रामदास)
लवथवती विक्राळा ब्रह्मांडी माळा। वीषें कंठ काळा त्रिनेत्री ज्वाळा। लावण्यसुंदर मस्तकी बाळा। तेथुनियां जळ निर्मळ वाहे झुळझुळां॥ जय देव जय देव जय श्रीशंकरा। आरती ओवाळूं तुज कर्पूरगौरा॥
विशाल ब्रह्मांड में हिलती मुंडमाला वाले, विष से काले कंठ और तीसरे नेत्र में ज्वाला वाले शिव, जिनके सिर पर सुंदर गंगा है और वहाँ से निर्मल जल झरझर बहता है। हे शंकर, आपकी जय हो; हे कपूर जैसे गोरे, मैं आपकी आरती उतारता हूँ।
दुर्गे दुर्घट भारी (श्री देवीची आरती)
दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी। अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी। वारी वारी जन्ममरणाते वारी। हारी पडलो आता संकट नीवारी॥ जय देवी जय देवी जय महिषासुरमथनी। सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी॥
हे दुर्गे, आपके बिना यह संसार बहुत कठिन है; हे अनाथों की नाथ अम्बे, अपनी करुणा फैलाइए। मेरे बार-बार के जन्म-मरण को रोकिए; मैं हार गया हूँ, अब संकट दूर कीजिए। हे महिषासुर का नाश करने वाली, देवताओं को वर देने वाली, तारने और जीवन देने वाली देवी, आपकी जय हो।
घालीन लोटांगण (संत नामदेव)
घालीन लोटांगण वंदीन चरण। डोळ्यांनी पाहीन रूप तुझें। प्रेमें आलिंगन आनंदें पूजिन। भावें ओवाळीन म्हणे नामा॥
नामदेव कहते हैं — मैं आपके आगे दंडवत लेटूँगा, चरणों की वंदना करूँगा, आँखों से आपका रूप देखूँगा, प्रेम से गले लगाऊँगा, आनंद से पूजा करूँगा और भाव से आरती उतारूँगा।
त्वमेव माता (समापन श्लोक)
त्वमेव माता च पिता त्वमेव। त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव। त्वमेव सर्वं मम देवदेव॥
हे देवों के देव, आप ही मेरी माता, पिता, भाई और मित्र हैं; आप ही विद्या और धन हैं; आप ही मेरा सब कुछ हैं।
कायेन वाचा (समर्पण श्लोक)
कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा। बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात्। करोमि यद्यत् सकलं परस्मै। नारायणायेति समर्पयामि॥
शरीर, वाणी, मन, इंद्रियों, बुद्धि या अपने स्वभाव से मैं जो कुछ भी करता हूँ, वह सब परमात्मा नारायण को समर्पित करता हूँ।
सुखकर्ता दुखहर्ता आरती का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।



