भगवान धन्वंतरि की आरती — जय धन्वंतरि देवा, बोल और अर्थ
‘जय धन्वंतरि देवा’ आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि की आरती है। धनतेरस को धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं, क्योंकि इसी दिन वे समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस दिन अच्छे स्वास्थ्य की कामना से यह आरती गाई जाती है।
धन्वंतरि मंत्र · धनतेरस और धन्वंतरि प्राकट्य की कथा · धनतेरस 2026 का समय
यह आरती/मंत्र श्रद्धा और परंपरा का विषय है; बीमारी में डॉक्टर की सलाह और इलाज ज़रूर लें।

जय धन्वंतरि देवा, जय जय धन्वंतरि जी देवा। जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा॥
हे धन्वंतरि देव, आपकी जय हो। बुढ़ापे और रोग से पीड़ित हर व्यक्ति को आप सुख देते हैं।
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए। देवासुर के संकट आकर दूर किए॥
आप समुद्र मंथन से हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए, और देवताओं-असुरों का संकट दूर किया।
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया। सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया॥
आपने आयुर्वेद की रचना की और उसे संसार में फैलाया; हमेशा स्वस्थ रहने के उपाय बताए।
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी। आयुर्वेद वनस्पति से, शोभा भारी॥
आपकी चार सुंदर भुजाएँ हैं, जिनमें शंख और अमृत है; आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों से आपकी बड़ी शोभा है।
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे। असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे॥
जो रोज़ आपका ध्यान करता है, उससे रोग दूर रहते हैं — ऐसा भक्तों का विश्वास है।
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा। वैद्य-समाज तुम्हारे, चरणों का घेरा॥
हे प्रभु, आपका सेवक हाथ जोड़कर खड़ा है; वैद्य-समाज आपके चरणों के पास रहता है।
धन्वंतरि जी की आरती, जो कोई नर गावे। रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे॥
जो धन्वंतरि जी की यह आरती गाता है, उसके पास रोग-शोक नहीं आते और वह सुख-समृद्धि पाता है।
भगवान धन्वंतरि की आरती का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।
