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धन्वंतरि मंत्र — अर्थ और जाप विधि

धन्वंतरि मंत्र आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि का मंत्र है, जिसे अच्छे स्वास्थ्य की कामना से धनतेरस (धन्वंतरि जयंती) पर और रोज़ की पूजा में जपा जाता है।

धनतेरस की सुबह या शाम, पीले फूल और घी का दीपक अर्पित कर 108 बार जाप करें — जाप माला · धन्वंतरि आरती

यह आरती/मंत्र श्रद्धा और परंपरा का विषय है; बीमारी में डॉक्टर की सलाह और इलाज ज़रूर लें।

धन्वंतरि मंत्र — अर्थ और जाप विधि

धन्वंतरि मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः॥

हाथ में अमृत कलश धारण करने वाले, सब रोगों का नाश करने वाले, तीनों लोकों के स्वामी, भगवान वासुदेव के रूप धन्वंतरि को नमस्कार।

धन्वंतरि गायत्री मंत्र

ॐ आदिवैद्याय विद्महे अमृतकलशहस्ताय धीमहि। तन्नो धन्वन्तरिः प्रचोदयात्॥

हम पहले वैद्य को जानते हैं, हाथ में अमृत कलश वाले का ध्यान करते हैं; वे धन्वंतरि हमें प्रेरित करें।

सरल नाम मंत्र

ॐ धन्वन्तरये नमः॥

भगवान धन्वंतरि को नमस्कार।

धन्वंतरि मंत्र का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

धन्वंतरि मंत्र कब जपें?

धनतेरस (धन्वंतरि जयंती) पर विशेष रूप से, और रोज़ सुबह पूजा में।

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