कुबेर मंत्र — अर्थ और जाप विधि
कुबेर मंत्र धन के देवता कुबेर की पूजा का प्रमुख मंत्र है, जिसमें उनसे घर में धन-धान्य की समृद्धि माँगी जाती है। धनतेरस और दिवाली की रात इसका 108 बार जाप किया जाता है।
जाप विधि: धनतेरस या दिवाली की शाम, उत्तर की ओर मुँह करके, घी का दीपक जलाकर, कमलगट्टे या स्फटिक की माला से 108 बार जाप करें। गिनती के लिए ऑनलाइन जाप माला · कुबेर जी की आरती

कुबेर मंत्र (धन-धान्य के लिए)
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये। धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
हे यक्षराज कुबेर, विश्रवा के पुत्र, धन और अन्न के स्वामी — मुझे धन-धान्य की समृद्धि दीजिए, दिलवाइए।
कुबेर गायत्री मंत्र
ॐ यक्षराजाय विद्महे वैश्रवणाय धीमहि। तन्नो कुबेरः प्रचोदयात्॥
हम यक्षों के राजा को जानते हैं, विश्रवा-पुत्र का ध्यान करते हैं; वे कुबेर हमें सही राह पर प्रेरित करें।
सरल नाम मंत्र
ॐ कुबेराय नमः॥
कुबेर जी को नमस्कार। जो लंबा मंत्र न बोल सकें, वे यह छोटा नाम-मंत्र 108 बार जप सकते हैं।
कुबेर मंत्र का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।


