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यम दीपदान मंत्र — धनतेरस पर यम का दीपक कैसे जलाएँ

धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके यमराज के नाम का चौमुखा दीपक जलाया जाता है और यह मंत्र बोला जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार में अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। कुछ परिवार यह दीपक नरक चतुर्दशी की शाम भी जलाते हैं।

विधि: आटे या मिट्टी का चौमुखा दीपक लें, उसमें सरसों का तेल और चार बत्तियाँ डालें। प्रदोष काल में घर के बाहर दक्षिण दिशा में रखकर जलाएँ, जल अर्पित करें और मंत्र बोलें। दीपक जलाकर पीछे मुड़कर न देखें। — यम दीपक की कथा · धनतेरस 2026 का प्रदोष काल

यम दीपदान मंत्र — धनतेरस पर यम का दीपक कैसे जलाएँ

यम दीपदान मंत्र (स्कंद पुराण)

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतामिति॥

त्रयोदशी के दिन किए गए इस दीपदान से, पाश और दंड धारण करने वाले, काल और श्यामा के साथ रहने वाले सूर्यपुत्र यमराज प्रसन्न हों।

सरल प्रार्थना (हिंदी में)

हे यमराज, यह दीपक आपको अर्पित है। हमारे परिवार की रक्षा करें, अकाल मृत्यु का भय दूर करें॥

जिन्हें संस्कृत मंत्र बोलने में कठिनाई हो, वे अपने शब्दों में यह प्रार्थना कर सकते हैं।

यम दीपदान मंत्र का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यम का दीपक किस दिशा में जलाते हैं?

दक्षिण दिशा में, क्योंकि दक्षिण को यमराज की दिशा माना जाता है।

यम दीपक में कौन सा तेल डालें?

परंपरा में सरसों का तेल; दीपक आटे या मिट्टी का चौमुखा (चार बत्ती वाला) होता है।

यम दीपदान क्यों करते हैं?

राजा हिम के पुत्र की कथा के अनुसार, यमराज को प्रसन्न करने और परिवार को अकाल मृत्यु के भय से बचाने के लिए।

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