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जसोदा हरि पालनैं झुलावै — सूरदास — पूरे बोल और भावार्थ

‘जसोदा हरि पालनैं झुलावै’ सूरदास की रचना है। यशोदा जी कान्हा को पालने में झुला रही हैं, दुलार रही हैं और लोरी गा रही हैं — ‘निंदिया, तू जल्दी आकर मेरे लाल को सुला दे।’ कान्हा कभी पलकें मूँद लेते हैं, कभी होंठ फड़काते हैं। सूरदास कहते हैं कि जो सुख देवताओं और मुनियों को भी दुर्लभ है, वह नंद की पत्नी यशोदा को मिल रहा है।

सूरदास की रचना। सभी संत भजन।

पाठभेद: यह पाठ प्रचलित संस्करणों से लिया गया है; अलग-अलग पुस्तकों और गायकों में कुछ शब्द अलग मिलते हैं। हम इसे मुद्रित संस्करण से मिलान कर रहे हैं।

जसोदा हरि पालनैं झुलावै — सूरदास — पूरे बोल और भावार्थ

जसोदा हरि पालनैं झुलावै। हलरावै, दुलराइ मल्हावै, जोइ-सोइ कछु गावै॥ मेरे लाल कौं आउ निंदरिया, काहैं न आनि सुवावै। तू काहैं नहिं बेगहिं आवै, तोकौं कान्ह बुलावै॥ कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै। सोवत जानि मौन ह्वै कै रहि, करि करि सैन बतावै॥ इहिं अंतर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरैं गावै। जो सुख सूर अमर-मुनि दुरलभ, सो नँद-भामिनि पावै॥

भावार्थ: यशोदा जी कान्हा को पालने में झुला रही हैं, दुलार रही हैं और लोरी गा रही हैं — ‘निंदिया, तू जल्दी आकर मेरे लाल को सुला दे।’ कान्हा कभी पलकें मूँद लेते हैं, कभी होंठ फड़काते हैं। सूरदास कहते हैं कि जो सुख देवताओं और मुनियों को भी दुर्लभ है, वह नंद की पत्नी यशोदा को मिल रहा है।

जसोदा हरि पालनैं झुलावै — सूरदास का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Jasoda Hari Palnain Jhulavai — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Jasoda hari palnain jhulavai ।
Halravai, dularai malhavai, joi-soi kachhu gavai ॥
Mere lal kaun au nindriya, kahain na ani suvavai ।
Tu kahain nahin beghin avai, tokaun kanha bulavai ॥
Kabhun palak hari mundi let hain, kabhun adhar pharkavai ।
Sovat jani maun hvai kai rahi, kari kari sain batavai ॥
Ihin antar akulai uthe hari, jasumti madhurain gavai ।
Jo sukh sur amar-muni durlabh, so nand-bhamini pavai ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

‘जसोदा हरि पालनैं झुलावै’ किसने लिखा?

सूरदास ने।

‘जसोदा हरि पालनैं झुलावै’ का अर्थ क्या है?

यशोदा जी कान्हा को पालने में झुला रही हैं, दुलार रही हैं और लोरी गा रही हैं — ‘निंदिया, तू जल्दी आकर मेरे लाल को सुला दे।’ कान्हा कभी पलकें मूँद लेते हैं, कभी होंठ फड़काते हैं। सूरदास कहते हैं कि जो सुख देवताओं और मुनियों को भी दुर्लभ है, वह नंद की पत्नी यशोदा को मिल रहा है।

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