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मंगल की सेवा सुन मेरी देवा — काली माता आरती — पूरे बोल और हिंदी अर्थ

‘मंगल की सेवा सुन मेरी देवा’ माँ काली (महाकाली) की पारंपरिक आरती है, जो नवरात्रि, माता की चौकी और जागरण में गाई जाती है। इसकी टेक है ‘संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जय काली कल्याण करे’। इसमें माँ के रक्तबीज, शुम्भ-निशुम्भ और महिषासुर वध का वर्णन है।

नवरात्रि, अष्टमी, काली पूजा और माता की चौकी में — साथ में अम्बे तू है जगदम्बे काली और जय अम्बे गौरी। अलग-अलग क्षेत्रों में कुछ शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है।

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा — काली माता आरती — पूरे बोल और हिंदी अर्थ

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े। पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥ सुन जगदम्बे कर न विलम्बे, संतन के भंडार भरे। संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जय काली कल्याण करे॥

हे देवी माँ, हमारी मंगल सेवा (आरती) सुनिए; हम हाथ जोड़कर आपके द्वार पर खड़े हैं। पान, सुपारी, ध्वजा, नारियल और ज्योति आपको भेंट करते हैं। हे जगदम्बा, देर मत कीजिए — आप संतों के भंडार भरती हैं। संतों की रक्षा करने वाली, सदा खुशहाली देने वाली माँ काली, आपकी जय हो, सबका कल्याण करो।

बुद्धि विधाता तू जग माता, मेरा कारज सिद्ध करे। चरण कमल का लिया आसरा, शरण तुम्हारी आन पड़े॥ जब-जब भीर पड़ी भक्तन पर, तब-तब आय सहाय करे। संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जय काली कल्याण करे॥

आप बुद्धि देने वाली जगत माता हैं, मेरे काम सफल करो। आपके चरण कमलों का सहारा लेकर हम आपकी शरण में आए हैं। जब-जब भक्तों पर संकट आया, आपने आकर उनकी सहायता की।

बार-बार तैं सब जग मोह्यो, तरुणी रूप अनूप धरे। माता होकर पुत्र खिलावे, कहीं भार्या भोग करे॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जय काली कल्याण करे॥

आप बार-बार सुंदर युवती का अनुपम रूप धरकर सारे जगत को मोहित करती हैं। कहीं आप माता बनकर पुत्र को खिलाती हैं, कहीं पत्नी बनकर घर संभालती हैं — हर स्त्री रूप में आप ही हैं।

संतन सुखदाई सदा सहाई, संत खड़े जयकार करें। ब्रह्मा विष्णु महेश सहसफण लिए, भेंट देन तेरे द्वार खड़े॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जय काली कल्याण करे॥

आप संतों को सुख देने वाली और सदा सहायता करने वाली हैं; संत आपकी जयकार करते हैं। ब्रह्मा, विष्णु, महेश और हज़ार फणों वाले शेषनाग भी आपको भेंट देने आपके द्वार पर खड़े हैं।

अटल सिंहासन बैठी मेरी माता, सिर सोने का छत्र फिरे। वार शनिश्चर कुंकुम बरणो, जब लुँकड़ पर हुकुम करे॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जय काली कल्याण करे॥

मेरी माता अटल सिंहासन पर विराजमान हैं और उनके सिर पर सोने का छत्र घूमता है। शनिवार को कुंकुम जैसे लाल रंग में सजी माँ अपने सेवक वीर (लुँकड़/लांगुर) को आदेश देती हैं।

खड्ग खप्पर त्रिशूल हाथ लिए, रक्तबीज को भस्म करे। शुम्भ निशुम्भ को क्षण में मारे, महिषासुर को पकड़ दले॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जय काली कल्याण करे॥

हाथों में तलवार, खप्पर और त्रिशूल लेकर आपने रक्तबीज को भस्म किया। शुम्भ-निशुम्भ को पल भर में मारा और महिषासुर को पकड़कर कुचल दिया।

आदित वारी आदि भवानी, जन अपने को कष्ट हरे। कुपित होय दानव मारे, चण्ड मुण्ड सब चूर करे॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जय काली कल्याण करे॥

रविवार को आप आदि भवानी के रूप में अपने भक्तों के कष्ट हरती हैं। क्रोध करके आपने दानवों को मारा और चण्ड-मुण्ड को चूर-चूर कर दिया।

जब तुम देखी दया रूप हो, पल में संकट दूर करे। सौम्य स्वभाव धर्यो मेरी माता, जन की अरज कबूल करे॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जय काली कल्याण करे॥

जब आप दया भरी नज़र से देखती हैं, तो पल भर में संकट दूर हो जाता है। मेरी माता ने शांत, कोमल स्वभाव धारण किया है और वे भक्तों की प्रार्थना स्वीकार करती हैं।

सात बार की महिमा बरनी, सब गुण कौन बखान करे। सिंह पीठ पर चढ़ी भवानी, अटल भवन में राज्य करे॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जय काली कल्याण करे॥

सातों वारों में आपकी महिमा गाई गई है, पर आपके सारे गुणों का बखान कौन कर सकता है? सिंह की पीठ पर सवार भवानी अपने अटल भवन में राज करती हैं।

दर्शन पावें मंगल गावें, सिद्ध साधक तेरी भेंट धरें। ब्रह्मा वेद पढ़ें तेरे द्वारे, शिव शंकर हरि ध्यान धरें॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जय काली कल्याण करे॥

भक्त आपके दर्शन पाकर मंगल गीत गाते हैं, सिद्ध और साधक आपको भेंट चढ़ाते हैं। आपके द्वार पर ब्रह्मा वेद पढ़ते हैं और शिव-शंकर तथा हरि आपका ध्यान करते हैं।

इन्द्र कृष्ण तेरी करें आरती, चँवर कुबेर डुलाय रहे। जय जननी जय मातु भवानी, अटल भवन में राज्य करे॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, मैया जय काली कल्याण करे॥

इंद्र और कृष्ण आपकी आरती करते हैं और कुबेर आप पर चँवर डुलाते हैं। हे जननी, हे माँ भवानी, आपकी जय हो — आप अपने अटल भवन में सदा राज करें।

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा — काली माता आरती का पाठ पूरा हुआ।

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पाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।

Mangal Ki Seva Sun Meri Deva — Lyrics in English

अंग्रेज़ी अक्षरों (Roman Hindi) में पढ़ें

Mangal ki seva sun meri deva, hath jor tere dwar khare ।
Pan supari dhvaja nariyal, le jvala teri bhent dhare ॥
Sun jagadambe kar na vilambe, santan ke bhandar bhare ।
Santan pratipali sada khushhali, maiya jai kali kalyan kare ॥

Buddhi vidhata tu jag mata, mera karaj siddh kare ।
Charan kamal ka liya asra, sharan tumhari an pare ॥
Jab-jab bhir pari bhaktan par, tab-tab ay sahay kare ।
Santan pratipali sada khushhali, maiya jai kali kalyan kare ॥

Bar-bar tain sab jag mohyo, taruni rup anup dhare ।
Mata hokar putra khilave, kahin bharya bhog kare ॥
Santan pratipali sada khushhali, maiya jai kali kalyan kare ॥

Santan sukhadai sada sahai, sant khare jaykar karen ।
Brahma vishnu mahesh sahasphan lie, bhent den tere dwar khare ॥
Santan pratipali sada khushhali, maiya jai kali kalyan kare ॥

Atal sinhasan baithi meri mata, sir sone ka chhatra phire ।
Var shanishchar kunkum barno, jab lunkar par hukum kare ॥
Santan pratipali sada khushhali, maiya jai kali kalyan kare ॥

Khadga khappar trishul hath lie, raktabij ko bhasma kare ।
Shumbh nishumbh ko kshan men mare, mahishasur ko pakar dale ॥
Santan pratipali sada khushhali, maiya jai kali kalyan kare ॥

Adit vari adi bhavani, jan apne ko kasht hare ।
Kupit hoy danav mare, chand mund sab chur kare ॥
Santan pratipali sada khushhali, maiya jai kali kalyan kare ॥

Jab tum dekhi daya rup ho, pal men sankat dur kare ।
Saumya swabhav dharyo meri mata, jan ki araj kabul kare ॥
Santan pratipali sada khushhali, maiya jai kali kalyan kare ॥

Sat bar ki mahima barni, sab gun kaun bakhan kare ।
Sinh pith par charhi bhavani, atal bhavan men rajya kare ॥
Santan pratipali sada khushhali, maiya jai kali kalyan kare ॥

Darshan paven mangal gaven, siddh sadhak teri bhent dharen ।
Brahma ved parhen tere dware, shiv shankar hari dhyan dharen ॥
Santan pratipali sada khushhali, maiya jai kali kalyan kare ॥

Indra krishna teri karen arti, chanvar kuber dulay rahe ।
Jai janni jai matu bhavani, atal bhavan men rajya kare ॥
Santan pratipali sada khushhali, maiya jai kali kalyan kare ॥

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

‘मंगल की सेवा सुन मेरी देवा’ किस देवी की आरती है?

माँ काली (महाकाली) की। इसकी टेक में ‘मैया जय काली कल्याण करे’ आता है।

मंगल की सेवा आरती कब गाई जाती है?

नवरात्रि के दिनों में, दुर्गा अष्टमी, काली पूजा (दिवाली की रात), माता की चौकी और जागरण में।

‘संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली’ का अर्थ क्या है?

संतों (भक्तों) की रक्षा करने वाली और सदा खुशहाली देने वाली माँ।

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