पूजा सामग्री
- लकड़ी की चौकी, लाल या पीला कपड़ा
- भगवान धन्वंतरि, कुबेर और लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर या मूर्ति
- घी का दीपक, 13 मिट्टी के दीये, एक चौमुखा दीपक (यम दीपदान के लिए)
- रोली, अक्षत (साबुत चावल), हल्दी, फूल, धूप-अगरबत्ती
- मिठाई, फल, साबुत धनिया, गुड़
- नई ख़रीदी चीज़ें — बर्तन, सिक्का या गहना
- सब सामान एक जगह: पूजा सामग्री ख़रीदें
पूजा की विधि — स्टेप बाय स्टेप
- शाम से पहले घर की सफ़ाई करें और मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएँ।
- प्रदोष काल में उत्तर या पूर्व की ओर मुँह करके बैठें। चौकी पर कपड़ा बिछाकर तस्वीरें रखें।
- सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें, फिर दीपक जलाकर संकल्प लें।
- धन्वंतरि पूजा: रोली, अक्षत, फूल चढ़ाएँ और ‘ॐ धन्वंतरये नमः’ का 11 या 108 बार जाप करें। परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
- कुबेर पूजा: नई ख़रीदी चीज़ें और तिजोरी या पर्स पूजा में रखें, रोली-अक्षत चढ़ाएँ और कुबेर मंत्र का जाप करें।
- लक्ष्मी पूजा: माँ लक्ष्मी को फूल, मिठाई और साबुत धनिया अर्पित करें।
- धन्वंतरि आरती और कुबेर आरती करें, फिर प्रसाद बाँटें।
- घर में 13 दीये जलाएँ — मुख्य द्वार, रसोई, तुलसी और पानी की जगह पर।
यम दीपदान कैसे करें
- पूजा के बाद आटे या मिट्टी का चौमुखा दीपक लें और उसमें सरसों का तेल डालें।
- घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके दीपक रखें।
- यमराज से परिवार की लंबी उम्र की प्रार्थना करें। मंत्र और पूरी विधि: यम दीपदान मंत्र।
- दीपक जलाकर बिना पीछे मुड़े घर के अंदर आ जाएँ।
पूजा का समय
त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर सुबह 10:31 से 7 नवंबर सुबह 10:49 तक है। पूजा 6 नवंबर की शाम प्रदोष काल में करें — दिल्ली में 5:32 से 7:56 बजे तक। दूसरे शहरों का समय और धनतेरस की पूरी जानकारी।
जानकारी की जाँच: 27 अक्टूबर 2026। ये परंपराएँ और मान्यताएँ हैं; अपने परिवार की रीति को प्राथमिकता दें।
