शेंदुर लाल चढ़ायो — गणेश आरती — बोल और हिंदी अर्थ
‘शेंदुर लाल चढ़ायो’ महाराष्ट्र में गाई जाने वाली हिंदी (दखनी) गणपति आरती है, जो ‘सुखकर्ता दुखहर्ता’ के बाद गाई जाती है। अंतिम पद में रचनाकार ‘गोसावीनंदन’ का नाम आता है।
गणेश चतुर्थी और बुधवार — साथ में सुखकर्ता दुखहर्ता और जय गणेश देवा।

शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको। दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरीहरको। हाथ लिए गुड़लड्डू साँई सुरवरको। महिमा कहे न जाय लागत हूँ पदको॥
हाथी के मुख वाले गणेश जी को सुंदर लाल सिंदूर चढ़ाया गया है। बड़े पेट वाले, लाल रंग में शोभित, गौरी और शिव के पुत्र हाथ में गुड़ के लड्डू लिए हैं — देवताओं में श्रेष्ठ उन स्वामी की महिमा कही नहीं जाती, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूँ।
जय देव जय देव, जय जय श्री गणराज। विद्या सुखदाता, धन्य तुम्हारो दर्शन, मेरा मन रमता॥
हे देव, हे गणराज, आपकी जय हो! आप विद्या और सुख देने वाले हैं। आपका दर्शन धन्य है — मेरा मन उसी में रम जाता है। (टेक — हर पद के बाद गाई जाती है)
अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरी। विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी। कोटि सूरज प्रकाश ऐसी छबि तेरी। गंडस्थल मदमस्तक झूले शशिबिहारी॥
आठों सिद्धियाँ आपकी दासी हैं और आप संकटों के शत्रु हैं। आप विघ्नों का नाश करने वाले, मंगल की मूर्ति और सबके अधिकारी हैं। आपकी छवि करोड़ों सूर्यों जैसी चमकती है; आपके मस्तक पर चंद्रमा शोभा देता है।
भाव भगत से कोई शरणागत आवे। संतति संपति सबही भरपूर पावे। ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे। गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे॥
जो भी भाव और भक्ति से आपकी शरण में आता है, वह संतान, संपत्ति — सब कुछ भरपूर पाता है। हे महाराज, आप मुझे ऐसे ही बहुत प्रिय हैं; गोसावी-नंदन (रचनाकार) दिन-रात आपके गुण गाते हैं।
जय देव जय देव, जय जय श्री गणराज। विद्या सुखदाता, धन्य तुम्हारो दर्शन, मेरा मन रमता॥
आरती का समापन टेक के साथ — हे गणराज, आपकी जय हो।
शेंदुर लाल चढ़ायो — गणेश आरती का पाठ पूरा हुआ।
किसी अपने को WhatsApp पर भेजेंपाठ पारंपरिक है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों में थोड़ा अंतर मिलता है। अर्थ सरल हिंदी में OmKiran Bhakti ने लिखा है। कोई त्रुटि दिखे तो YouTube पर कमेंट करके बताएँ।




