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पापांकुशा एकादशी कब है?

पापांकुशा एकादशी 2026 में 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को है। यह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। व्रत का पारण 23 अक्टूबर: सुबह 6:26 के बाद, दोपहर 2:37 से पहले करें।

पापांकुशा एकादशी

पापांकुशा एकादशी: तारीख़ और पारण समय

सालतारीख़एकादशी तिथिपारण (व्रत खोलना)
202622 अक्टूबर 2026, गुरुवारदोपहर 2:13, 21 अक्टूबर से
दोपहर 2:49, 22 अक्टूबर तक
23 अक्टूबर: सुबह 6:26 के बाद, दोपहर 2:37 से पहले
202711 अक्टूबर 2027, सोमवारसुबह 11:41, 10 अक्टूबर से
दोपहर 2:09, 11 अक्टूबर तक
12 अक्टूबर: सुबह 6:19 के बाद, शाम 4:14 से पहले

उदया तिथि के नियम से, नई दिल्ली के अनुसार।

पापांकुशा एकादशी का महत्व

📖 पापांकुशा एकादशी की कथा पढ़ें — सरल हिंदी में

कहाँ मनाया जाता है: पूरे भारत में

दशहरे के बाद आने वाली यह एकादशी पापों पर अंकुश लगाने वाली मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ रूप की पूजा की जाती है।

कभी-कभी स्मार्त (गृहस्थ) और वैष्णव एकादशी अलग-अलग दिन पड़ती है; वैष्णव परंपरा वाले अगले दिन व्रत रखते हैं।

पापांकुशा एकादशी की पूजा विधि

  1. दशमी की रात से सात्विक भोजन करें और चावल न खाएँ।
  2. एकादशी की सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
  3. विष्णु जी को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत चढ़ाएँ, घी का दीपक जलाएँ।
  4. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें, विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा पढ़ें।
  5. दिन में फलाहार या निर्जल व्रत अपनी क्षमता के अनुसार रखें, रात में भजन-कीर्तन करें।
  6. अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद, द्वादशी खत्म होने से पहले दान देकर व्रत खोलें (पारण)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पापांकुशा एकादशी 2026 कब है?

पापांकुशा एकादशी 2026 में 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को है। यह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। व्रत का पारण 23 अक्टूबर: सुबह 6:26 के बाद, दोपहर 2:37 से पहले करें।

पापांकुशा एकादशी का पारण कब है?

23 अक्टूबर: सुबह 6:26 के बाद, दोपहर 2:37 से पहले (नई दिल्ली)।

पापांकुशा एकादशी का महत्व क्या है?

दशहरे के बाद की एकादशी, पापों पर अंकुश लगाने वाली। दशहरे के बाद आने वाली यह एकादशी पापों पर अंकुश लगाने वाली मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ रूप की पूजा की जाती है।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू, शकरकंद और सेंधा नमक। चावल, गेहूँ, दालें, प्याज़-लहसुन और साधारण नमक नहीं खाते।

एकादशी का पारण कब करें?

अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई हिस्सा) बीत जाने पर पारण करना श्रेष्ठ माना गया है।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

परंपरा के अनुसार एकादशी पर अन्न, ख़ासकर चावल, का त्याग किया जाता है, ताकि मन और शरीर हल्का रहे और ध्यान भगवान में लगे।

Papankusha Ekadashi 2026 date and parana time?

Papankusha Ekadashi 2026: 22 October 2026. Parana (vrat kholna): 23 अक्टूबर: सुबह 6:26 के बाद, दोपहर 2:37 से पहले (New Delhi).

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