परिवर्तिनी एकादशी कब है?
परिवर्तिनी एकादशी 2027 में 11 सितंबर 2027, शनिवार को है। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसे पार्श्व, जलझूलनी एकादशी भी कहते हैं। व्रत का पारण 12 सितंबर: सुबह 6:04 के बाद, रात 10:14 से पहले करें।

परिवर्तिनी एकादशी: तारीख़ और पारण समय
| साल | तारीख़ | एकादशी तिथि | पारण (व्रत खोलना) |
|---|---|---|---|
| 2027 | 11 सितंबर 2027, शनिवार | शाम 5:01, 10 सितंबर से रात 7:37, 11 सितंबर तक | 12 सितंबर: सुबह 6:04 के बाद, रात 10:14 से पहले |
उदया तिथि के नियम से, नई दिल्ली के अनुसार।
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व
कहाँ मनाया जाता है: पूरे भारत में
योगनिद्रा में भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी या पार्श्व एकादशी कहते हैं। इस दिन वामन रूप की पूजा होती है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश में इसे जलझूलनी एकादशी कहते हैं, जब ठाकुर जी को पालकी में बिठाकर जल विहार कराया जाता है।
कभी-कभी स्मार्त (गृहस्थ) और वैष्णव एकादशी अलग-अलग दिन पड़ती है; वैष्णव परंपरा वाले अगले दिन व्रत रखते हैं।
परिवर्तिनी एकादशी की पूजा विधि
- दशमी की रात से सात्विक भोजन करें और चावल न खाएँ।
- एकादशी की सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
- विष्णु जी को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत चढ़ाएँ, घी का दीपक जलाएँ।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें, विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा पढ़ें।
- दिन में फलाहार या निर्जल व्रत अपनी क्षमता के अनुसार रखें, रात में भजन-कीर्तन करें।
- अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद, द्वादशी खत्म होने से पहले दान देकर व्रत खोलें (पारण)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
परिवर्तिनी एकादशी 2027 कब है?
परिवर्तिनी एकादशी 2027 में 11 सितंबर 2027, शनिवार को है। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसे पार्श्व, जलझूलनी एकादशी भी कहते हैं। व्रत का पारण 12 सितंबर: सुबह 6:04 के बाद, रात 10:14 से पहले करें।
परिवर्तिनी एकादशी का पारण कब है?
12 सितंबर: सुबह 6:04 के बाद, रात 10:14 से पहले (नई दिल्ली)।
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व क्या है?
योगनिद्रा में भगवान विष्णु के करवट बदलने का दिन, वामन पूजा। योगनिद्रा में भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी या पार्श्व एकादशी कहते हैं। इस दिन वामन रूप की पूजा होती है।
एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?
फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू, शकरकंद और सेंधा नमक। चावल, गेहूँ, दालें, प्याज़-लहसुन और साधारण नमक नहीं खाते।
एकादशी का पारण कब करें?
अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई हिस्सा) बीत जाने पर पारण करना श्रेष्ठ माना गया है।
एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?
परंपरा के अनुसार एकादशी पर अन्न, ख़ासकर चावल, का त्याग किया जाता है, ताकि मन और शरीर हल्का रहे और ध्यान भगवान में लगे।
Parivartini Ekadashi 2027 date and parana time?
Parivartini Ekadashi 2027: 11 September 2027. Parana (vrat kholna): 12 सितंबर: सुबह 6:04 के बाद, रात 10:14 से पहले (New Delhi).
