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विजया एकादशी कब है?

विजया एकादशी 2027 में 3 मार्च 2027, बुधवार को है। यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। व्रत का पारण 4 मार्च: सुबह 6:43 के बाद करें।

विजया एकादशी

विजया एकादशी: तारीख़ और पारण समय

सालतारीख़एकादशी तिथिपारण (व्रत खोलना)
20273 मार्च 2027, बुधवारसुबह 4:45, 3 मार्च से
सुबह 7:25, 4 मार्च तक
4 मार्च: सुबह 6:43 के बाद

उदया तिथि के नियम से, नई दिल्ली के अनुसार।

विजया एकादशी का महत्व

कहाँ मनाया जाता है: पूरे भारत में

लंका पर चढ़ाई से पहले श्रीराम ने बकदाल्भ्य ऋषि के कहने पर समुद्र किनारे यह व्रत रखा था। इसलिए इसे विजय दिलाने वाली एकादशी कहते हैं।

कभी-कभी स्मार्त (गृहस्थ) और वैष्णव एकादशी अलग-अलग दिन पड़ती है; वैष्णव परंपरा वाले अगले दिन व्रत रखते हैं।

विजया एकादशी की पूजा विधि

  1. दशमी की रात से सात्विक भोजन करें और चावल न खाएँ।
  2. एकादशी की सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
  3. विष्णु जी को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत चढ़ाएँ, घी का दीपक जलाएँ।
  4. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें, विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा पढ़ें।
  5. दिन में फलाहार या निर्जल व्रत अपनी क्षमता के अनुसार रखें, रात में भजन-कीर्तन करें।
  6. अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद, द्वादशी खत्म होने से पहले दान देकर व्रत खोलें (पारण)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विजया एकादशी 2027 कब है?

विजया एकादशी 2027 में 3 मार्च 2027, बुधवार को है। यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। व्रत का पारण 4 मार्च: सुबह 6:43 के बाद करें।

विजया एकादशी का पारण कब है?

4 मार्च: सुबह 6:43 के बाद (नई दिल्ली)।

विजया एकादशी का महत्व क्या है?

विजय देने वाली एकादशी, श्रीराम ने लंका जाने से पहले रखी। लंका पर चढ़ाई से पहले श्रीराम ने बकदाल्भ्य ऋषि के कहने पर समुद्र किनारे यह व्रत रखा था। इसलिए इसे विजय दिलाने वाली एकादशी कहते हैं।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू, शकरकंद और सेंधा नमक। चावल, गेहूँ, दालें, प्याज़-लहसुन और साधारण नमक नहीं खाते।

एकादशी का पारण कब करें?

अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई हिस्सा) बीत जाने पर पारण करना श्रेष्ठ माना गया है।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

परंपरा के अनुसार एकादशी पर अन्न, ख़ासकर चावल, का त्याग किया जाता है, ताकि मन और शरीर हल्का रहे और ध्यान भगवान में लगे।

Vijaya Ekadashi 2027 date and parana time?

Vijaya Ekadashi 2027: 03 March 2027. Parana (vrat kholna): 4 मार्च: सुबह 6:43 के बाद (New Delhi).

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