पूजा के नियम
व्रत, पूजा, तुलसी, शिवलिंग, श्राद्ध और ग्रहण के पारंपरिक नियम — क्या करें और क्या न करें, सरल हिंदी में।

- एकादशी व्रत के नियमक्या करें, क्या न करें, क्या खाएँ
- शिवलिंग पर क्या चढ़ाएँ, क्या न चढ़ाएँजल, बेलपत्र और वर्जित चीज़ें
- तुलसी के नियमकब न तोड़ें, कैसे पूजें
- पितृ पक्ष के नियमश्राद्ध में क्या करें, क्या न करें
- नवरात्रि व्रत के नियम9 दिन क्या करें, क्या न करें
- सावन सोमवार व्रत के नियमपूजा विधि और परहेज़
- करवा चौथ व्रत के नियमसरगी से पारण तक
- दिवाली पर क्या करें, क्या न करेंलक्ष्मी पूजा के नियम
- शनि देव की पूजा के नियमशनिवार को क्या करें
- ग्रहण के नियमसूतक में क्या करें, क्या न करें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एकादशी व्रत के नियम क्या हैं?
एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाया जाता, दशमी की रात से सात्विक भोजन किया जाता है और अगले दिन द्वादशी में पारण किया जाता है। दिन में भगवान विष्णु की पूजा, जप और कथा का विशेष महत्व है। पूरे नियम पढ़ें
शिवलिंग पर क्या चढ़ाएँ, क्या न चढ़ाएँ क्या हैं?
शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल और चंदन चढ़ाया जाता है। परंपरा के अनुसार शिवलिंग पर तुलसी, केतकी का फूल, हल्दी, कुमकुम (सिंदूर) और शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता। पूरे नियम पढ़ें
तुलसी के नियम क्या हैं?
परंपरा के अनुसार रविवार, एकादशी, अमावस्या, ग्रहण और सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते। तुलसी को रोज़ सुबह जल और शाम को दीपक दिया जाता है, और शिव जी व गणेश जी की पूजा में तुलसी नहीं चढ़ाई जाती। पूरे नियम पढ़ें
पितृ पक्ष के नियम क्या हैं?
पितृ पक्ष (श्राद्ध) के 16 दिनों में पितरों का तर्पण, श्राद्ध और दान किया जाता है। इन दिनों विवाह, गृह प्रवेश, नई ख़रीदारी जैसे शुभ काम और तामसिक भोजन से परहेज़ किया जाता है। पूरे नियम पढ़ें
नवरात्रि व्रत के नियम क्या हैं?
नवरात्रि में पहले दिन कलश स्थापना करके नौ दिन माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, अखंड ज्योति जलाई जाती है और सात्विक भोजन या फलाहार किया जाता है। प्याज़-लहसुन, अनाज (व्रत रखने वाले के लिए), बाल-नाखून काटना और तामसिक चीज़ें टाली जाती हैं। पूरे नियम पढ़ें
सावन सोमवार व्रत के नियम क्या हैं?
सावन सोमवार को सुबह स्नान करके शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाया जाता है, ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप और सोमवार व्रत कथा सुनी जाती है। व्रत में दिन में एक बार फलाहार या शाम को सात्विक भोजन किया जाता है। पूरे नियम पढ़ें
